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अज़ीज़ फ़ैसल शायरी | शाही शायरी

अज़ीज़ फ़ैसल शेर

20 शेर

वे बालों में कलर लगवा चुका है
ये धोका पाँच सौ में खा चुका है

अज़ीज़ फ़ैसल




मैं एक बोरी में लाया हूँ भर के मूँग-फली
किसी के साथ दिसम्बर की रात काटनी है

अज़ीज़ फ़ैसल




मोअर्रिख़ लिख न दें सुक़रात मुझ को
मैं लस्सी का पियाला पी रहा हूँ

अज़ीज़ फ़ैसल




न ये क़ानून काम आया था राँझे के ज़रा सा भी
उसी को भैंस मिलती है हो जिस के हाथ में लाठी

अज़ीज़ फ़ैसल




थका हारा निकल कर घर से अपने
वो पीर ऑफ़िस में सोने जा चुका है

अज़ीज़ फ़ैसल




वो साड़ी ज्यूलरी के तहाइफ़ पे थी ब-ज़िद
हम सौ रूपे की शाल से आगे नहीं गए

अज़ीज़ फ़ैसल




ये दिया मैसेज ट्वीटर पर फ़सादी शख़्स ने
उस को जलती के लिए फ़िल-फ़ौर ऑइल चाहिए

अज़ीज़ फ़ैसल




वो तीस साल से है फ़क़त बीस साल की
चेहरे पे आ चुकी है बुज़ुर्गी जमाल की

अज़ीज़ फ़ैसल




कूदे हैं उस के सेहन में दो-चार शेर-दिल
हम फेसबुक की वाल से आगे नहीं गए

अज़ीज़ फ़ैसल