मेरी मिट्टी से बहुत ख़ुश हैं मिरे कूज़ा-गर
वैसा बन जाता हूँ मैं जैसा बनाते हैं मुझे
अंजुम सलीमी
मैं जिस चराग़ से बैठा था लौ लगाए हुए
पता चला वो अंधेरे में रख रहा था मुझे
अंजुम सलीमी
मैं ख़ुद से मिल के कभी साफ़ साफ़ कह दूँगा
मुझे पसंद नहीं है मुदाख़लत अपनी
अंजुम सलीमी
मैं सब का सब मोहब्बत के लिए हूँ
सो ला-महदूद मुद्दत के लिए हूँ
अंजुम सलीमी
मेरे चेहरे पे हैं आँखें मिरे सीने में है दिल
इस लिए तेरी हिफ़ाज़त नहीं कर सकता मैं
अंजुम सलीमी
मुझ से ख़ाली है मेरा आईना
आँसुओं से भरा हुआ हूँ मैं
अंजुम सलीमी
मुझे पता है कि बर्बाद हो चुका हूँ मैं
तू मेरा सोग मना मुझ को सोगवार न कर
अंजुम सलीमी
मैं एक एक तमन्ना से पूछ बैठा हूँ
मुझे यक़ीं नहीं आता कि मेरा सब है तू
अंजुम सलीमी
मिट के आसूदा हो गया हूँ मैं
ख़ाक में ख़ाक-ज़ाद मिल गया है
अंजुम सलीमी

