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अदीम हाशमी शायरी | शाही शायरी

अदीम हाशमी शेर

19 शेर

माह अच्छा है बहुत ही न ये साल अच्छा है
फिर भी हर एक से कहता हूँ कि हाल अच्छा है

अदीम हाशमी




याद कर के और भी तकलीफ़ होती थी 'अदीम'
भूल जाने के सिवा अब कोई भी चारा न था

अदीम हाशमी




वो कि ख़ुशबू की तरह फैला था मेरे चार-सू
मैं उसे महसूस कर सकता था छू सकता न था

अदीम हाशमी




वो जो तर्क-ए-रब्त का अहद था कहीं टूटने तो नहीं लगा
तिरे दिल के दर्द को देख कर मिरे दिल में दर्द है किस लिए

अदीम हाशमी




शोर सा एक हर इक सम्त बपा लगता है
वो ख़मोशी है कि लम्हा भी सदा लगता है

अदीम हाशमी




सदाएँ एक सी यकसानियत में डूब जाती हैं
ज़रा सा मुख़्तलिफ़ जिस ने पुकारा याद रहता है

अदीम हाशमी




परिंदा जानिब-ए-दाना हमेशा उड़ के आता है
परिंदे की तरफ़ उड़ कर कभी दाना नहीं आता

अदीम हाशमी




परिंदा जानिब-ए-दाना हमेशा उड़ के आता है
परिंदे की तरफ़ उड़ कर कभी दाना नहीं आता

अदीम हाशमी




मिरे हमराह गरचे दूर तक लोगों की रौनक़ है
मगर जैसे कोई कम है कभी मिलने चले आओ

अदीम हाशमी