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यही रस्सी मिली थी | शाही शायरी
yahi rassi mili thi

नज़्म

यही रस्सी मिली थी

शारिक़ कैफ़ी

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लटकने को यही रस्सी मिली थी
ज़मीं पर गिर के मैं हँसने लगा इस मौत पर

अभी कुछ देर पहले
जो मुझे इतनी भयानक लग रही थी