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वो सारे लफ़्ज़ झूटे थे | शाही शायरी
wo sare lafz jhuTe the

नज़्म

वो सारे लफ़्ज़ झूटे थे

शारिक़ कैफ़ी

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मोहब्बत की कमी
लफ़्ज़ों से पूरी कर रहा था मैं

मगर जब आज
मैं सच-मुच में उस को चाहता हूँ

उसे मुझ से शिकायत है ख़मोशी की
कोई बतलाए उस को

ये ख़मोशी ही तो सच्ची है
वो सारे लफ़्ज़ झूटे थे