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विष-कन्या | शाही शायरी
wish-kanya

नज़्म

विष-कन्या

सत्यपाल आनंद

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किस जटा-धारी शो से सीखा था
और कब अब ये बात याद नहीं

नाग-विद्या का गान साँपों को
बस में करने का फ़न हमारा था

नाग-स्वामी थे ज़हर को तिरयाक़
में बदलने का इल्म रखते थे

डर से निव्ढ़ाए अपने नाग-फनी
साँप ख़ुद माँगते थे हम से पनाह

नाग-विद्या का सारा ज्ञान लिए
हम कमाल-ए-हुनर के मालिक थे

लेकिन इक दिन अजीब बात हुई
एक विश-कन्या प्यार से आ कर

यूँ गले लग गई कि सारा ज्ञान
बस को अमृत में ज़हर को तिरयाक़

मैं बदलने का इल्म सब मंतर
भूल बैठे कि उस के होंटों का

ज़हर आब-ए-हयात था और हम
लाख जन्मों की प्यास रखते थे