ख़ुश्बू की आवाज़ सुनी
ग़ुंचा-ए-लब के खिलते ही
पानी पर कुछ नक़्श बने
परतव-ए-शाख़ के हिलते ही
सारी बातें भूल गए
उस से आँखें मिलते ही
नज़्म
विसाल
सरवत हुसैन
नज़्म
सरवत हुसैन
ख़ुश्बू की आवाज़ सुनी
ग़ुंचा-ए-लब के खिलते ही
पानी पर कुछ नक़्श बने
परतव-ए-शाख़ के हिलते ही
सारी बातें भूल गए
उस से आँखें मिलते ही