EN اردو
तज्ज़िया | शाही शायरी
tajziya

नज़्म

तज्ज़िया

शहराम सर्मदी

;

आज जिस तनाज़ुर में
काएनात को देखा

हर तरह मुकम्मल थी
पहले इतनी शिद्दत से

कब ख़याल आया था
इस क़दर अकेला हूँ