सख़ावत के फ़रिश्ते को उतरता देख कर सूरज
हुआ रू-पोश बादल में, ज़मीं कहने लगी आओ
तलाई, नुक़रई सिक्के उछालो शादमानी के
खुलें औराक़ लोगों पर किताब-ए-ज़िंदगानी के
नज़्म
सख़ावत का फ़रिश्ता
सरवत हुसैन
नज़्म
सरवत हुसैन
सख़ावत के फ़रिश्ते को उतरता देख कर सूरज
हुआ रू-पोश बादल में, ज़मीं कहने लगी आओ
तलाई, नुक़रई सिक्के उछालो शादमानी के
खुलें औराक़ लोगों पर किताब-ए-ज़िंदगानी के