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पहले सफ़्हे की पहली सुर्ख़ी | शाही शायरी
pahle safhe ki pahli surKHi

नज़्म

पहले सफ़्हे की पहली सुर्ख़ी

शहरयार

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हिमालिया की बुलंद चोटी पे
बर्फ़ के एक सुबुक मकाँ में

बुझी हुई मिश्अलों का जल्सा
अज़ीम और आलमी मसाइल पे

एक हफ़्ते से हो रहा है
सिफ़्र तलक दर्जा-ए-हरारत पहुँच चुका है

मज़ीद तफ़्सील राज़ में है