उजले परिंदो वो दिन कितना मैला होगा
आसमान बहुत दूर दूर तक फैला होगा
मैं कश्ती के फ़र्श पे गिर जाऊँगा थक कर
पानी का हाथ सुला देगा मुझे थपक कर
नज़्म
पानी का हाथ
सरवत हुसैन
नज़्म
सरवत हुसैन
उजले परिंदो वो दिन कितना मैला होगा
आसमान बहुत दूर दूर तक फैला होगा
मैं कश्ती के फ़र्श पे गिर जाऊँगा थक कर
पानी का हाथ सुला देगा मुझे थपक कर