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jinhen main DhunDhta tha aasmanon mein zaminon mein wo nikle mere zulmat-KHana-e-dil ke makinon mein
नज़्म
शबनम अशाई
वो जो तेज़ धूप कै खुरदुरे रास्तों पर बे-रंग हो गई थी एक वक़्त की सत-रंगी ओढ़नी थी बे-रंग को दुनिया किसी भी रंग में रंग देती है एक दिन वो भी रंगरेज़ के हाथों रंग गई और ओढ़नी फट गई