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नज़्म | शाही शायरी
nazm

नज़्म

नज़्म

शबनम अशाई

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वो जो
तेज़ धूप कै

खुरदुरे रास्तों पर
बे-रंग हो गई थी

एक वक़्त की
सत-रंगी

ओढ़नी थी
बे-रंग को दुनिया

किसी भी रंग में
रंग देती है

एक दिन
वो भी

रंगरेज़ के हाथों
रंग गई

और
ओढ़नी फट गई