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मौसम-ए-हिज्र में | शाही शायरी
mausam-e-hijr mein

नज़्म

मौसम-ए-हिज्र में

शहराम सर्मदी

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तुम्हारी आँख भी हर रोज़ काजल से सँवरती है
मुझे भी शेव करने में कभी नाग़ा नहीं होता