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तलाफ़ी वफ़ा की जफ़ा चाहता हूँ | शाही शायरी
talafi wafa ki jafa chahta hun

ग़ज़ल

तलाफ़ी वफ़ा की जफ़ा चाहता हूँ

ज़हीर देहलवी

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तलाफ़ी वफ़ा की जफ़ा चाहता हूँ
तुम्हीं ख़ुद ये कह दो बुरा चाहता हूँ

कोई मोल ले तो बिका चाहता हूँ
मैं साहब से बंदा हुआ चाहता हूँ

तुम्हीं चाहो मुझ को तो क्या चाहिए फिर
मैं इस के सिवा और क्या चाहता हूँ

मिरा मुद्दआ क्या समझते नहीं हो
तुम्हें चाहता हूँ तो क्या चाहता हूँ

मसीहा हो गर तुम तो अपने लिए हो
मैं अपने मरज़ की दवा चाहता हूँ

तुम्हें चाहूँ मैं तुम रक़ीबों को चाहो
ये इंसाफ़ पेश-ए-ख़ुदा चाहता हूँ