साफ़ बता दे जो तू ने देखा है दिन रात
दुनिया के डर से न रख दिल में दिल की बात
मख़मूर सईदी
मैं उस के वादे का अब भी यक़ीन करता हूँ
हज़ार बार जिसे आज़मा लिया मैं ने
To this day her promises I do still believe
who a thousand times has been wont to deceive
मख़मूर सईदी
मस्लहत के हज़ार पर्दे हैं
मेरे चेहरे पे कितने चेहरे हैं
मख़मूर सईदी
मुद्दतों बाद हम किसी से मिले
यूँ लगा जैसे ज़िंदगी से मिले
मख़मूर सईदी
रास्ते शहर के सब बंद हुए हैं तुम पर
घर से निकलोगे तो 'मख़मूर' किधर जाओगे
मख़मूर सईदी
रख़्त-ए-सफ़र जो पास हमारे न था तो क्या
शौक़-ए-सफ़र को साथ लिया और चल पड़े
मख़मूर सईदी
रविश रविश पर बाग़ हैं काँटे कलियाँ फूल
मैं ने काँटे चुन लिए हुई ये कैसी भूल
मख़मूर सईदी
उन से उम्मीद-ए-मुलाक़ात के बाद ऐ 'मख़मूर'
मुद्दतों तक न ख़ुद अपने से मुलाक़ात हुई
मख़मूर सईदी
ज़बाँ पे शुक्र ओ शिकायत के सौ फ़साने हैं
मगर जो दिल पे गुज़रती है क्या कहा जाए
मख़मूर सईदी

