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अहसन मारहरवी शायरी | शाही शायरी

अहसन मारहरवी शेर

24 शेर

रोक ले ऐ ज़ब्त जो आँसू कि चश्म-ए-तर में है
कुछ नहीं बिगड़ा अभी तक घर की दौलत घर में है

अहसन मारहरवी




मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है
ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है

अहसन मारहरवी




मुतमइन अपने यक़ीं पर अगर इंसाँ हो जाए
सौ हिजाबों में जो पिन्हाँ है नुमायाँ हो जाए

अहसन मारहरवी




नाकाम हैं असर से दुआएँ दुआ से हम
मजबूर हैं कि लड़ नहीं सकते ख़ुदा से हम

अहसन मारहरवी




क़ासिद नई अदा से अदा-ए-पयाम हो
मतलब ये है कि बात न हो और कलाम हो

अहसन मारहरवी




राह-ए-उल्फ़त का निशाँ ये है कि वो है बे-निशाँ
जादा कैसा नक़्श-ए-पा तक कोई मंज़िल में नहीं

अहसन मारहरवी




तंग आ गया हूँ वुस्अत-ए-मफ़हूम-ए-इश्क़ से
निकला जो हर्फ़ मुँह से वो अफ़्साना हो गया

अहसन मारहरवी




ये सदमा जीते जी दिल से हमारे जा नहीं सकता
उन्हें वो भूले बैठे हैं जो उन पर मरने वाले हैं

अहसन मारहरवी




तमाम उम्र इसी रंज में तमाम हुई
कभी ये तुम ने न पूछा तिरी ख़ुशी क्या है

अहसन मारहरवी