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सदमा | शाही शायरी
sadma

नज़्म

सदमा

साक़ी फ़ारुक़ी

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वो सोला बहारों के बाद
दोबारा मिला है

तो क्या है
कि मुख़्तार को देख कर

मेरी आँखों में
हैरत के आसार पैदा हुए

मेरा दिल बुझ गया है
वो अय्यार

यारों का यार
अपना लहजा इसी तरह से नर्म-रेज़

और नज़र तेज़ रक्खे
मगर

उस से किस ने कहा था
कि ख़ुशबू, शराब और औरत से

परहेज़ रक्खे.......