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नज़्म | शाही शायरी
nazm

नज़्म

नज़्म

शबनम अशाई

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अक्स
दिल में कैसा है

किस का है इंतिज़ार
बरसों गुज़रे

इस साए में
रक़्सिंदा हूँ

रंग चेहरे का
चराग़ आँखों के

धुँदले पड़ गए
कोई ख़ुदा

न हम-साया-ए-ख़ुदा
हर लम्हा

इक बार-ए-गराँ
दूर तक

सुनसान रास्ता
गर्द-आलूद