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नज़्म | शाही शायरी
nazm

नज़्म

नज़्म

सरवत हुसैन

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फूल पानी पर खिला मिरी मौजूदगी का
सल्तनत सुब्ह-ए-बहाराँ की

बहुत नज़दीक से आवाज़ देती है
सुबुक-रफ़्तार

पैहम घूमते पहिए
गिराँ-ख़्वाबी से जागे

आफ़्ताबी पैरहन का घेर दीवारों को छूता
प्यार करता

रक़्स फ़रमाता
अरे!!!

सूरज निकल आया.....