उस ने जो ज़र्ब लगाई मुझे भरपूर लगी
मैं ने जब वार क्या उस की जगह ख़ाली थी
थक गया चूर हुआ हार गया
वो मिरा दुश्मन-ए-अय्यार मुझे मार गया
आख़िरी वक़्त में देखा तो वो दुश्मन मेरा
और तो कुछ भी न था मेरी ही परछाईं था
नज़्म
मेरा दुश्मन
सलीम अहमद

