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महरान, मुझे दो | शाही शायरी
mahran, mujhe do

नज़्म

महरान, मुझे दो

सरवत हुसैन

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महरान, मुझे दो
आवाज़ का इक पँख

महरान, मुझे दो
टूटे हुए रिश्ते

पुरखों के नविश्ते
महरान, मुझे दो

ज़रख़ेज़ किनारा
ये हाथ तुम्हारा

गर्म और सुनहरा
महरान, मुझे दो

उम्मीद और पानी