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कहाँ है आ जा | शाही शायरी
kahan hai aa ja

नज़्म

कहाँ है आ जा

शकील बदायुनी

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राहत-ए-बंदा-ए-बे-दाम कहाँ है आ जा
पैकर-हुस्न सर-ए-बाम कहाँ है आ जा

रौनक़-ए-बज़्म है ओ जाम कहाँ है आ जा
ज़ीनत-ए-जल्वा-गह-ए-आम कहाँ है आ जा

ऐ उमीद-ए-दिल-ए-ना-काम कहाँ है आ जा
तेरी फ़ुर्क़त ख़लल-अंदाज़-ए-सुकून-ए-पैहम

तेरी फ़ुर्क़त दिल-ए-मायूस पे इक तुर्फ़ा सितम
तेरी फ़ुर्क़त सबब-ए-काविश-ओ-बेदारी-ए-ग़म

तू नहीं है तो फिर आराम कहाँ है आ जा
शाहिद-ए-दौर-ए-सियह-बख़्त ओ शब-ए-तार हूँ मैं

ख़ूगर-ए-नाला-ए-लज़्ज़त-कश-ए-आवाज़ हूँ मैं
दाम-ए-तूफ़ान-ए-हवादिस में गिरफ़्तार हूँ मैं

रोज़-ओ-शब मुंतज़िर-ए-दीद-ए-रुख़-ए-यार हूँ मैं
दिल है वक़्फ़-ए-ग़म-ए-आलाम कहाँ है आ जा

शोला-ए-बर-कफ़-ए-गुल दाग़-ए-जिगर तेरे बग़ैर
ख़ार-बर्दोश है दामान-ए-नज़र तेरे बग़ैर

ख़ूँ-फ़िशाँ है शब-ए-ग़म दीदा-ए-तर तेरे बग़ैर
चलन आता ही नहीं शाम-ओ-सहर तेरे बग़ैर

मुंतज़िर हूँ सहर-ओ-शाम कहाँ है आ जा
दौर-ए-तारीकी-ए-ग़म से शब-ए-तन्हाई से

दम-ब-दम जोश-ए-जुनूँ की सितम-आराई से
का'बा-ओ-दैर-ओ-कलीसा की जबीं-साई से

ख़ौफ़-ए-मजबूरी-ओ-नाकामी-ओ-रुस्वाई से
इश्क़ है लर्ज़ा-बर-अंदाम कहाँ है आ जा

मुंतशिर होने लगी अंजुमन-ए-नाज़-ए-हयात
बन गया ख़्वाब हर इक मंज़र-ए-आग़ाज़-ए-हयात

दम-शिकस्ता सा नज़र आने लगा साज़-ए-हयात
अब कोई दम में हुआ जाता है वा राज़-ए-हयात

आ गया नज़्अ' का हंगाम कहाँ है आ जा