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रहता तो है उस बज़्म में चर्चा मिरे दिल का | शाही शायरी
rahta to hai us bazm mein charcha mere dil ka

ग़ज़ल

रहता तो है उस बज़्म में चर्चा मिरे दिल का

ज़हीर देहलवी

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रहता तो है उस बज़्म में चर्चा मिरे दिल का
अच्छा है ये अच्छा हो न सौदा मिरे दिल का

है जोश-ए-क़लक़ म'अरका-आरा मिरे दिल का
हंगामा है दिल पर मिरे बरपा मिरे दिल का

है सैर निगाहों में शबिस्तान अदू की
क्या मुझ से छुपाते हो तमाशा मिरे दिल का

इक मश्ग़ला ठहरी है तुम्हें रंजिश-ए-बेजा
इक खेल हुआ तुम को सताना मिरे दिल का

बे-ख़ुद हूँ तसव्वुर में किसी बर्क़-ए-अदा के
सरमाया-ए-तस्कीं है तड़पना मिरे दिल का

बर्बाद न जाएगी 'ज़हीर' अपनी मुसीबत
आख़िर तो कहीं सब्र पड़ेगा मिरे दिल का