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लर्ज़िश-ए-पर्दा-ए-इज़हार का मतलब क्या है | शाही शायरी
larzish-e-parda-e-izhaar ka matlab kya hai

ग़ज़ल

लर्ज़िश-ए-पर्दा-ए-इज़हार का मतलब क्या है

ज़फ़र इक़बाल

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लर्ज़िश-ए-पर्दा-ए-इज़हार का मतलब क्या है
है ये दीवार तो दीवार का मतलब क्या है

जिस का इंकार हथेली पे लिए फिरता हूँ
जानता ही नहीं इंकार का मतलब क्या है

एक बार उस ने अगर दे ही दिया साफ़ जवाब
फिर उसी बात पे इसरार का मतलब क्या है

बेचना कुछ नहीं इस ने तो ख़रीदार हैं क्यूँ
आख़िर इस गर्मी-ए-बाज़ार का मतलब क्या है

उस की राहों में बिखर जाए ये ख़ाकिस्तर-ए-चश्म
और अपने लिए दीदार का मतलब क्या है

रब्त बाक़ी नहीं अल्फ़ाज़ ओ मआनी में 'ज़फ़र'
क्या कहें उस से कि इस प्यार का मतलब क्या है