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हस्ती अपनी हबाब की सी है | शाही शायरी
hasti apni habab ki si hai

ग़ज़ल

हस्ती अपनी हबाब की सी है

मीर तक़ी मीर

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हस्ती अपनी हबाब की सी है
ये नुमाइश सराब की सी है

my life is like a bubble now
mirage-like appears this show

नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है

the softness of her lips is close
to velvet petals of a rose

चश्म-ए-दिल खोल इस भी आलम पर
याँ की औक़ात ख़्वाब की सी है

do let your heart's eye see this world
tis but a dreamlike state unfurled

बार बार उस के दर पे जाता हूँ
हालत अब इज़्तिराब की सी है

repeatedly to her address
I go, lo, such is my distress

नुक़्ता-ए-ख़ाल से तिरा अबरू
बैत इक इंतिख़ाब की सी है

your brow inscribed upon your skin
a line of poetry akin

मैं जो बोला कहा कि ये आवाज़
उसी ख़ाना-ख़राब की सी है

when I spoke out, she did complain
"that derelict is here again"

आतिश-ए-ग़म में दिल भुना शायद
देर से बू कबाब की सी है

this heart long burnt in sorrow's hell
there is a barbecue like smell

देखिए अब्र की तरह अब के
मेरी चश्म-ए-पुर-आब की सी है

just as a monsoon cloud appears
these eyes of mine are full of tears

'मीर' उन नीम-बाज़ आँखों में
सारी मस्ती शराब की सी है

miir in her half-ope eyes there is
the fullness of wine's heady bliss