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अजब इक तौर है जो हम सितम ईजाद रखें | शाही शायरी
ajab ek taur hai jo hum sitam ijad rakhen

ग़ज़ल

अजब इक तौर है जो हम सितम ईजाद रखें

जौन एलिया

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अजब इक तौर है जो हम सितम ईजाद रखें
कि न उस शख़्स को भूलें न उसे याद रखें

अहद इस कूचा-ए-दिल से है सो उस कूचे में
है कोई अपनी जगह हम जिसे बरबाद रखें

क्या कहें कितने ही नुक्ते हैं जो बरते न गए
ख़ुश-बदन इश्क़ करें और हमें उस्ताद रखें

बे-सुतूँ इक नवाही में है शहर-ए-दिल की
तेशा इनआ'म करें और कोई फ़रहाद रखें

आशियाना कोई अपना नहीं पर शौक़ ये है
इक क़फ़स लाएँ कहीं से कोई सय्याद रखें

हम को अन्फ़ास की अपने है इमारत करनी
इस इमारत की लबों पर तिरे बुनियाद रखें