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आँख में आँसू का और दिल में लहू का काल है | शाही शायरी
aankh mein aansu ka aur dil mein lahu ka kal hai

ग़ज़ल

आँख में आँसू का और दिल में लहू का काल है

अकबर हैदराबादी

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आँख में आँसू का और दिल में लहू का काल है
है तमन्ना का वही जो ज़िंदगी का हाल है

यूँ धुआँ देने लगा है जिस्म और जाँ का अलाव
जैसे रग रग में रवाँ इक आतिश-ए-सय्याल है

फैलते जाते हैं दाम-ए-नारसी के दाएरे
तेरे मेरे दरमियाँ किन हादसों का जाल है

घिर गई है दो ज़मानों की कशाकश में हयात
इक तरफ़ ज़ंजीर-ए-माज़ी एक जानिब हाल है

हिज्र की राहों से 'अकबर' मंज़िल-ए-दीदार तक
यूँ है जैसे दरमियाँ इक रौशनी का साल है