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Zindaa.n शायरी | शाही शायरी

Zindaa.n

2 शेर

ज़िंदगी जब्र है और जब्र के आसार नहीं
हाए इस क़ैद को ज़ंजीर भी दरकार नहीं

फ़ानी बदायुनी




क़फ़स से दूर सही मौसम-ए-बहार तो है
असीरो आओ ज़रा ज़िक्र-ए-आशियाँ हो जाए

सिराज लखनवी