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Aajizi शायरी | शाही शायरी

Aajizi

2 शेर

कुशादा दस्त-ए-करम जब वो बे-नियाज़ करे
नियाज़-मंद न क्यूँ आजिज़ी पे नाज़ करे

अल्लामा इक़बाल




मिन्नत-ओ-आजिज़ी ओ ज़ारी-ओ-आह
तेरे आगे हज़ार कर देखा

मीर मोहम्मदी बेदार