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अफ़ज़ल मिनहास शायरी | शाही शायरी

अफ़ज़ल मिनहास शेर

22 शेर

रस्ते में कोई पेड़ जो मिल जाए तो बैठूँ
वो बार उठाया है कि दिखने लगे शाने

अफ़ज़ल मिनहास




लोग मेरी मौत के ख़्वाहाँ हैं 'अफ़ज़ल' किस लिए
चंद ग़ज़लों के सिवा कुछ भी नहीं सामान में

अफ़ज़ल मिनहास




अपने माहौल से कुछ यूँ भी तो घबराए न थे
संग लिपटे हुए फूलों में नज़र आए न थे

अफ़ज़ल मिनहास




जाने ये हिद्दत चमन को रास आए या नहीं
आग जैसी कैफ़ियत है ख़ुशबुओं की लहर में

अफ़ज़ल मिनहास




इंसान बे-हिसी से है पत्थर बना हुआ
मुँह में ज़बान भी है लहू भी रगों में है

अफ़ज़ल मिनहास




हवा के फूल महकने लगे मुझे पा कर
मैं पहली बार हँसा ज़ख़्म को छुपाए हुए

अफ़ज़ल मिनहास




एक ही फ़नकार के शहकार हैं दुनिया के लोग
कोई बरतर किस लिए है कोई कम-तर किस लिए

अफ़ज़ल मिनहास




दिल की मस्जिद में कभी पढ़ ले तहज्जुद की नमाज़
फिर सहर के वक़्त होंटों पर दुआ भी आएगी

अफ़ज़ल मिनहास




दर्द ज़ंजीर की सूरत है दिलों में मौजूद
इस से पहले तो कभी इस के ये पैराए न थे

अफ़ज़ल मिनहास